अनजाने रास्ते


'मां तुम आज फिर... अब तक जाग रही हो?
कितनी बार समझा चुकी हूं कि ठंडी रातो में इतनी देर तक जागना तुम्हारी सेहत के लिए ठीक नहीं है। फिर से अस्थमा का दौरा पड सकता है। तुम समझने का नाम ही नहीं लेती हो।'
'आई बडी़ समझाने वाली ।बेटी, मेरी चिंता छोड़ अब जीना ही कितने दिन है। और जिसकी बेटी देर रात तक काम से लौटे उस मां को नींद कहां आएगी।'
मां दरवाजे पर ही टकटकी लगाए बैठी थीं।
' बेटी तेरा काम काम क्या है ? कहां काम पर जाती है ? किसके घर काम पर जाती है ?'
बेटी ने बीच में ही टोकते हुए कहां 'मां यह तुम्हारी दवाईयां। इन्हें खाकर सो जाओ, बाकी बातें सुबह करेंगे।'
' बेटी सुबह और रात के दरमियान बहुत लंबा फासला है। इस फासले के बीच तुम्हारा अनजान राहो से गुजरना और खूंखार कुत्तों का तुम पर भौकना! मां की आंखों में नींद कहां से आने देगा। '
'सूरज की रोशनी में चमकने वाले सफेदपोश चेहरे,चांदनी रात में कितने मटमैले हो जाते हैं। दुनिया का दोगला रूप तुम नहीं जानती हो?'
' मां अगर भैया अनजान रास्तों पर न भटके न होते और आज घर में होते,तो हमें यह दिन न देखने पडते। पर तुम चैन से सो जाओ। मां मेरी राहे अनजान नहीं हैं। मुझे नर्सिंग होम की नाइट ड्यूटी से, मरीजों की देखरेख से पैसे के साथ-साथ तुम्हारी दवाईयां भी नि:शुल्क मिल जाती है।' अब मां दवाई खाकर चैन की नींद सो रही थीं। 

Comments

Popular posts from this blog

Sony Liv Premium Mod

DISNEY HOTSTAR VIP

Saath Nibhaana Saathiya-2 की कहानी का ऐसा होगा प्लॉट, जानें गोपी बहू के टीवी शो से जुड़ी 5 अहम बातें